रावण की लंका की कहानी

रावण की लंका की कहानी

एक समय की बात है, जब भारत में एक राजा रावण नामक शक्तिशाली राक्षस राज्य लंका का शासन कर रहा था। रावण बहुत ही बुद्धिमान और बलशाली था, और उसकी लंका नगरी अपूर्व सुंदरता के साथ विश्वास करने वाले लोगों से भरी हुई थी।

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लंका नगरी एक अद्भुत स्थान थी, जहां रावण ने अपनी शक्ति और धन का उपयोग करके एक अद्वितीय नगरी बनाई थी। यहां उच्च गुणवत्ता के मंदिर, विद्यालय, और आदर्श निवास स्थान थे। लंका की सड़कें सुंदर फूलों से सजी हुई थीं और उसके आस-पास नदियाँ बह रही थीं।

रावण की लंका की खूबसूरती और धन की विशालता के बावजूद, उसके द्वारा किए गए कुछ गलत कार्यों ने उसे अपराधी बना दिया। रावण अहंकारी और अधर्मी हो गया था। उसने देवताओं को भी अपमानित किया और उनकी ताकत को चुनौती दी।

एक दिन, रावण ने देवराज इंद्र के स्वर्ग में घुसकर अपहरण किया। इसके पश्चात्, रावण ने अपनी बहन सुर्पणखा के कहने पर सीता माता का अपहरण किया। सीता माता भगवान राम की पत्नी थीं और उनका अपहरण रावण के अधर्म का प्रतीक बन गया।

रावण ने सीता माता को लंका ले जाकर अपने अशोक वन में बंद कर दिया। वहां पर उसने उन्हें दुखी और व्याकुल होने के लिए बहुत सताया। सीता माता ने अपने पति भगवान राम का नाम लेकर उसे आशा दिलाई कि उनकी मदद जल्दी होगी।

इस बीच, भगवान राम और उनके भाई लक्ष्मण ने अपनी वानवास काल में लंका की ओर अपना पथ बनाया। रावण को जानकर उन्होंने अपनी सेना के साथ लंका पर हमला किया।

युद्ध के दौरान, भगवान राम ने अपने विशेष शस्त्र ब्रह्मास्त्र का उपयोग करके रावण को मार डाला। रावण की मृत्यु के बाद, भगवान राम ने सीता माता को छुड़ाया और उन्हें लंका से वापस अयोध्या ले जाया।

रावण की मृत्यु के बाद, लंका नगरी नष्ट हो गई और उसकी सुंदरता गायब हो गई। लंका के लोग बहुत दुखी हो गए और उन्होंने अपने अधर्मी राजा के लिए शोक मनाया।

इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है कि अहंकार और अधर्म का परिणाम हमेशा बुरा होता है। रावण ने अपनी बुद्धिमानी और शक्ति का गलत उपयोग करके अपने अच्छे कर्मों को भूल गया था। इसलिए, उसे अपनी लंका की सुंदरता और सुख की खो देनी पड़ी।

यह कहानी हमें यह भी बताती है कि धर्म और सत्य की रक्षा करने वाले हमेशा जीतते हैं। भगवान राम ने अपनी धर्म की पालना करते हुए रावण को पराजित किया और अपनी पत्नी को छुड़ाया।

तो दोस्तों इस तरह रावण की लंका की कहानी हमें अधर्म के परिणामों को समझाती है और धर्म की महत्वपूर्णता को प्रकट करती है।

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