“रामलला हम आएंगे…” नारा देने वाले बाबा ने संघर्ष की कहानी बताई, रथ से अयोध्या जाएंगे।

रामलला प्रमाण प्रथिस्ता 

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राम मंदिर आंदोलन के दौरान यह नारा चर्चा में था। राम मंदिर आंदोलन का नारा था, “राम लला आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।” राम मंदिर आंदोलन के साथ इस नारे की कहानी भी जुड़ी हुई थी। उस समय, बाबा सत्यनारायण मौर्य के विचारों से निकले शब्दों ने अयोध्या की दीवारों को सुंदर बनाया। उनके गीत लोगों ने सुना। ओजस्वी कविताओं ने राष्ट्र और सनातन प्रेम की अलख जगाई, और बाबा की ख्याति बढ़ी।

खबर को आगे पढ़ें:

बाबा सत्यनारायण मौर्य कौन हैं?
क्या आपको न्योता मिला है कि आप रथ से रामलला के दरबार में पहुंचेंगे?
आइकॉनिक नारा कब बना?

बाबा की प्रतिभा की पहचान कैसे हुई

राम मंदिर आंदोलन का नारा था, “राम लला, हम आएंगे और मंदिर बनाएंगे।” विपक्ष ने कहा कि मंदिर बनाया जाएगा लेकिन तारीख नहीं बताएगा। बाबा सत्यनारायण मौर्य ने यह नारा दिया था। अयोध्या आंदोलन के दौरान दीवारों पर चित्र बनाकर नारे लिखे गए। इसी समय, आंदोलन के प्रमुख अशोक सिंघल ने बाबा का गीत सुना, जो बाद में आंदोलन का मुख्य गीत बन गया।

पार्टी का न्योता मिल गया

बाबा को भी अयोध्या जाने का निमंत्रण मिला है, और तैयारी पूरी हो गई है। Baba रथ पर अयोध्या जाएंगे। चित्रकूट से रथ अयोध्या जाता है। सत्यनारायण मौर्य इसे संघर्ष का परिणाम बताकर खुश हैं। कहते हैं कि आज मंदिर बनाना उस समय का संघर्ष है। R. भारत से बातचीत में, उन्होंने लोकप्रिय गीतों का जिक्र किया जो बहुत लोकप्रिय थे।सत्यनारायण मौर्या ने कहा कि हम रामलला आएंगे और वहीं मंदिर बनाएंगे।सत्य सिद्ध हो गया है।

पहली बार नारा कब लगाई गई?

रामजन्मभूमि आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण नारा था – रामलला हम आएंगे, वहीं मंदिर बनाएंगे। बजरंग दल के एक शिविर में यह नारा लगाया गया था। 1986 में उज्जैन में बजरंग दल के शिविर में बाबा सत्यनारायण मौर्य ने पहली बार यह नारा दिया, जो बाद में हर रामभक्त की जुबान पर चढ़ गया। सत्यनारायण मौर्य ने बताया कि 1986 में वह राजगढ़, मध्य प्रदेश से एम कॉम कर रहे थे। बाद में बजरंग दल ने उज्जैन में एक शिविर बनाया। मौर्य ने बताया कि मैं भी उस शिविर में था। शाम को शिविर में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। उसी कार्यक्रम में मैंने राम जन्मभूमि को लेकर यह नारा पहली बार कहा। हम वहाँ मंदिर बनाएंगे, रामलला।

रामजन्मभूमि आंदोलन का नारा

उनका कहना था कि स्वयंसेवकों ने इसे बाद में कई जगह लगाया और यह रामजन्मभूमि आंदोलन का एक महत्वपूर्ण नारा बन गया। 55 वर्षीय बाबा मौर्य ने बताया कि 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या के कार्यक्रम में उन्होंने ही पहला मंच संचालन किया था। उस समय वह आंदोलन के प्रचार में प्रमुख थे और श्रीराम और हनुमान के चित्रों के साथ नारे पूरे अयोध्या में लिखते थे। राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर उनका गाना भी बहुत लोकप्रिय था।

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